समय शब्दावली

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक समय-संबंधित शब्द और अवधारणाएं

भारतीय इतिहास के स्रोत

प्राचीन ग्रंथ, अभिलेख, सिक्के और पुरातात्विक प्रमाण

भारत पर हुए विदेशी आक्रमण

भारत पर हुए प्रमुख विदेशी आक्रमण और उनका प्रभाव

विदेशी यात्रियों का विवरण

भारत आने वाले प्रमुख विदेशी यात्रियों के विवरण

भारत के प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध

भारत के महत्वपूर्ण युद्धों का संक्षिप्त विवरण और परिणाम

इतिहास का संपूर्ण कालक्रम

प्राचीन काल से आधुनिक काल तक का विस्तृत कालक्रम

महत्वपूर्ण अध्याय

इतिहास के अति महत्वपूर्ण चैप्टर

हाल ही में जोड़ा गया

New

इतिहास के नए अध्याय और अपडेटेड सामग्री

महत्वपूर्ण तथ्य

इतिहास के उपयोगी स्मरणीय बिंदु (स्क्रॉल करके पढ़ें)

सोहन घाटी (पंजाब क्षेत्र) से भारत में पूर्व पाषाण काल के औजारों के सबसे पुराने साक्ष्य मिले हैं।
भीमबेटका गुफाएँ (मध्य प्रदेश) में मिले शैलचित्र प्रागैतिहासिक मानव जीवन को दर्शाते हैं।
मेहरगढ़ (बलूचिस्तान) दक्षिण एशिया में नवपाषाण कालीन कृषि जीवन का सबसे प्राचीन प्रमाण माना जाता है।
बुर्जहोम (कश्मीर) में नवपाषाण काल के गर्तावास (गड्ढेनुमा घर) मिले हैं।
दायमाबाद (महाराष्ट्र) कांस्ययुगीन सभ्यता का एक महत्वपूर्ण स्थल है, जहाँ काँसे की मूर्तियाँ मिली हैं।
सिंधु घाटी सभ्यता की खोज का श्रेय दयाराम साहनी (हड़प्पा, 1921) और राखालदास बनर्जी (मोहनजोदड़ो, 1922) को दिया जाता है।
इस सभ्यता की खुदाई का सामान्य निर्देशन उस समय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक सर जॉन मार्शल ने किया था।
सिंधु घाटी सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है, जो लगभग 2500-1900 ईसा पूर्व के बीच फली-फूली।
हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना में ग्रिड पद्धति, पक्की ईंटों के भवन तथा उन्नत जल-निकासी व्यवस्था विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
मोहनजोदड़ो में मिला महाकुंड (ग्रेट बाथ) सामूहिक स्नान या धार्मिक अनुष्ठान हेतु प्रयुक्त होता माना जाता है।
मोहनजोदड़ो से प्राप्त विशाल अन्नागार (ग्रेट ग्रेनरी) अनाज भंडारण की सुव्यवस्थित प्रणाली को दर्शाता है।
लोथल (गुजरात) अपने कृत्रिम बंदरगाह (डॉकयार्ड) के लिए प्रसिद्ध है, जो समुद्री व्यापार का प्रमाण देता है।
कालीबंगन (राजस्थान) से जुते हुए खेत तथा अग्निकुंडों के साक्ष्य मिले हैं।
धौलावीरा (गुजरात) में उन्नत जल प्रबंधन व्यवस्था तथा विशाल जलाशय पाए गए हैं।
राखीगढ़ी (हरियाणा) सिंधु घाटी सभ्यता के अब तक ज्ञात सबसे बड़े स्थलों में से एक है।
सुरकोतदा (गुजरात) से घोड़े की हड्डियों के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
चन्हूदड़ो एकमात्र ऐसा हड़प्पाई स्थल है जहाँ दुर्ग (सिटाडेल) नहीं मिला, यह मनके बनाने के उद्योग के लिए प्रसिद्ध था।
हड़प्पा सभ्यता के लोग पशुपति मुहर की पूजा करते थे, जिसे कुछ विद्वान शिव का प्रारंभिक रूप मानते हैं।
सिंधु घाटी सभ्यता के व्यापारिक संबंध मेसोपोटामिया सभ्यता से भी थे, जहाँ इसे 'मेलुहा' कहा गया।
सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि अब तक अपठित (अनडिसाइफर्ड) है, जिससे इसकी भाषा स्पष्ट नहीं हो पाई है।
इस सभ्यता के पतन के कारणों में आर्य आक्रमण सिद्धांत, जलवायु परिवर्तन तथा नदियों के मार्ग बदलने के सिद्धांत प्रमुख हैं।
ऋग्वेद विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों में गिना जाता है, जिसमें 10 मंडल और लगभग 1028 सूक्त हैं।
वैदिक साहित्य के चार वेदों में सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद भी शामिल हैं, जिनमें सामवेद को संगीत का आदि ग्रंथ माना जाता है।
ऋग्वैदिक आर्य मुख्यतः सप्त सिंधु क्षेत्र (पंजाब व आसपास) में निवास करते थे और पशुपालन प्रधान अर्थव्यवस्था अपनाते थे।
ऋग्वेद में वर्णित दाशराज्ञ युद्ध राजा सुदास और दस राजाओं के संघ के बीच परुष्णी नदी के तट पर हुआ था।
उत्तर वैदिक काल में लौह धातु का प्रयोग बढ़ा और कुरु-पांचाल क्षेत्र सत्ता का केंद्र बना।
उपनिषद ग्रंथों को वेदांत भी कहा जाता है, जिनमें आत्मा और ब्रह्म संबंधी दार्शनिक विचार मिलते हैं।
वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था तथा आश्रम व्यवस्था (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास) सामाजिक जीवन को नियंत्रित करती थी।
वैदिक काल में सभा और समिति नामक संस्थाएँ राजा के शासन में परामर्श हेतु कार्य करती थीं।
सोलह महाजनपदों का उल्लेख बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय में मिलता है, जो उत्तर वैदिक काल के बाद उभरे।
मगध महाजनपद अपनी उपजाऊ भूमि, लौह अयस्क और रणनीतिक स्थिति के कारण सबसे शक्तिशाली बनकर उभरा।
मगध के शासक बिंबिसार ने वैवाहिक संबंधों और विजय के माध्यम से राज्य का विस्तार किया।
बिंबिसार के पुत्र अजातशत्रु ने वज्जि संघ (लिच्छवि गणराज्य) को पराजित कर मगध साम्राज्य को और सुदृढ़ किया।
वज्जि संघ प्राचीन भारत के प्रमुख गणतांत्रिक राज्यों में से एक था, जिसकी राजधानी वैशाली थी।
ईरानी सम्राट दारा प्रथम ने छठी शताब्दी ईसा पूर्व में सिंधु घाटी क्षेत्र पर आक्रमण कर उसे अपने साम्राज्य में मिलाया।
सिकंदर (अलेक्जेंडर) ने 326 ईसा पूर्व भारत पर आक्रमण किया और झेलम के युद्ध में राजा पोरस से मुकाबला किया।
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ तथा 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ महावीर से पूर्ववर्ती माने जाते हैं।
महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे, जिनका जन्म कुंडग्राम (वैशाली) में हुआ था।
जैन धर्म के पंचमहाव्रत में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह शामिल हैं।
जैन धर्म बाद में दिगंबर और श्वेतांबर दो प्रमुख संप्रदायों में विभाजित हो गया।
प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में तथा द्वितीय संगीति वल्लभी में हुई थी।
चंद्रगुप्त मौर्य ने जीवन के अंतिम समय में जैन धर्म अपनाकर श्रवणबेलगोला में संथारा (उपवास द्वारा मृत्यु) लिया था।
गौतम बुद्ध का जन्म लुंबिनी में हुआ, गृहत्याग महाभिनिष्क्रमण कहलाया, तथा उन्हें बोधगया में ज्ञान प्राप्त हुआ।
बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया, जिसे धर्मचक्र प्रवर्तन कहते हैं।
बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य तथा अष्टांगिक मार्ग (मध्यम मार्ग) उसके मूल सिद्धांत हैं।
बुद्ध का महापरिनिर्वाण कुशीनगर में हुआ था, जिसे उनके जीवन की चौथी महत्वपूर्ण घटना माना जाता है।
त्रिरत्न — बुद्ध, धम्म और संघ — बौद्ध धर्म के आधारभूत स्तंभ माने जाते हैं।
प्रथम बौद्ध संगीति राजगृह में तथा तृतीय संगीति पाटलिपुत्र में सम्राट अशोक के काल में हुई थी।
चतुर्थ बौद्ध संगीति कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर में हुई, जिसमें बौद्ध धर्म महायान और हीनयान में विभाजित हुआ।
बौद्ध धर्म के प्रचार में महेंद्र और संघमित्रा (अशोक की संतानें) ने श्रीलंका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सांची स्तूप मूलतः अशोक द्वारा बनवाया गया और बाद के शासकों ने इसका विस्तार किया।
अजंता की गुफाएँ बौद्ध धर्म से संबंधित भित्तिचित्रों और मूर्तिकला के लिए विश्वप्रसिद्ध हैं।
चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 322 ईसा पूर्व मगध में नंद वंश को हराकर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की।
चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त भी कहा जाता है, चंद्रगुप्त के प्रमुख मार्गदर्शक और मंत्री थे।
कौटिल्य रचित अर्थशास्त्र प्राचीन भारत में राजनीति, अर्थव्यवस्था व प्रशासन से संबंधित विषयों का महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें राज्य को सप्तांग सिद्धांत से समझाया गया है।
यूनानी राजदूत मेगस्थनीज चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था और उसने इंडिका नामक ग्रंथ लिखा।
मौर्य प्रशासन में गुप्तचरी व्यवस्था तथा नगर प्रशासन हेतु नगर व्यवस्थापक समितियों का उल्लेख मिलता है।
बिंदुसार, चंद्रगुप्त का पुत्र, मौर्य साम्राज्य का द्वितीय शासक था, जिसे यूनानी स्रोतों में 'अमित्रघात' कहा गया।
अशोक ने लगभग 261 ईसा पूर्व कलिंग युद्ध के बाद हिंसा त्यागकर बौद्ध धर्म अपनाया।
अशोक की जनकल्याणकारी नीति को धम्म कहा गया, जिसके प्रचार हेतु उसने धम्म महामात्य नियुक्त किए।
अशोक के शिलालेख व स्तंभलेख प्राकृत भाषा में ब्राह्मी व खरोष्ठी लिपि में लिखे गए हैं और उसकी नीति के प्रमुख स्रोत हैं।
सारनाथ स्तंभ पर बना चतुर्मुखी सिंह आज भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।
अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य साम्राज्य कमजोर होता गया और अंतिम शासक बृहद्रथ की हत्या उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने कर दी।
शुंग वंश की स्थापना पुष्यमित्र शुंग ने की, जिसने सांची स्तूप के विस्तार को संरक्षण दिया।
शुंगों के बाद कण्व वंश का शासन आया, जिसका अंतिम शासक वासुदेव था।
उत्तर-पश्चिम भारत में इंडो-ग्रीक शासकों में मिनांडर (मिलिंद) प्रमुख था, जिसने बौद्ध धर्म अपनाया, जिसका उल्लेख मिलिंदपन्हो ग्रंथ में मिलता है।
शक शासक रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख संस्कृत भाषा का पहला बड़ा शिलालेख माना जाता है।
कुषाण वंश के शासक कनिष्क ने शक संवत् प्रारंभ किया और पुरुषपुर (पेशावर) को अपनी राजधानी बनाया।
कुषाण काल में गांधार कला शैली का विकास हुआ, जिसमें भारतीय व यूनानी शैलियों का मिश्रण दिखता है।
कुषाण साम्राज्य रेशम मार्ग (सिल्क रूट) पर व्यापार नियंत्रण के कारण समृद्ध हुआ।
दक्षिण भारत में सातवाहन वंश के शासक गौतमीपुत्र सातकर्णी ने शक शासकों को पराजित कर अपनी शक्ति स्थापित की।
सातवाहन काल की अमरावती कला शैली बौद्ध स्तूप निर्माण के लिए प्रसिद्ध है।
दक्षिण भारत में संगम साहित्य तमिल भाषा में रचा गया, जो पांड्य, चोल व चेर वंशों के इतिहास पर प्रकाश डालता है।
तोल्काप्पियम तमिल व्याकरण का सबसे प्राचीन ग्रंथ माना जाता है।
संगम युग में भारत का रोम साम्राज्य के साथ काली मिर्च व मसालों का समुद्री व्यापार होता था।
गुप्त साम्राज्य की स्थापना श्रीगुप्त ने की, परंतु इसे सुदृढ़ता चंद्रगुप्त प्रथम ने दी, जिसने लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया।
समुद्रगुप्त को उसकी दिग्विजयों के कारण भारत का नेपोलियन कहा जाता है, जिसका विवरण प्रयाग प्रशस्ति में हरिषेण ने लिखा।
चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) ने शक शासकों को पराजित कर उज्जैन पर अधिकार किया और उपाधि 'शकारि' धारण की।
चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबार में नवरत्न नामक नौ विद्वान सुशोभित थे, जिनमें कालिदास प्रमुख थे।
गुप्त काल को कला, साहित्य, विज्ञान और संस्कृति की उन्नति के कारण स्वर्ण युग कहा जाता है।
आर्यभट्ट ने आर्यभटीय की रचना कर शून्य, दशमलव प्रणाली तथा खगोल विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वराहमिहिर ने पंचसिद्धांतिका की रचना कर ज्योतिष व खगोल विज्ञान में योगदान दिया।
सुश्रुत प्राचीन भारत के प्रसिद्ध शल्य चिकित्सक थे, जिन्हें शल्य चिकित्सा का जनक माना जाता है।
कालिदास, गुप्त काल के महान कवि, ने अभिज्ञानशाकुंतलम् जैसी कालजयी रचनाएँ लिखीं।
दिल्ली स्थित मेहरौली का लौह स्तंभ गुप्तकालीन धातुकर्म की उन्नत तकनीक का प्रमाण है, जिसमें आज तक जंग नहीं लगी।
चीनी यात्री फाह्यान चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में भारत आया और अपने यात्रा-वृतांत में तत्कालीन समाज का वर्णन किया।
नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम ने की, जो शिक्षा का विश्वप्रसिद्ध केंद्र बना।
गुप्त साम्राज्य का पतन हूण आक्रमणों (तोरमाण व मिहिरकुल के नेतृत्व में) के कारण हुआ।
गुप्तोत्तर काल में भू-दान प्रथा के बढ़ने से सामंतवाद (फ्यूडलिज्म) की शुरुआत मानी जाती है।
हर्षवर्धन ने कन्नौज को राजधानी बनाकर उत्तर भारत के बड़े भू-भाग पर शासन किया।
हर्षवर्धन के दरबारी कवि बाणभट्ट ने हर्षचरित और कादंबरी की रचना की।
चीनी यात्री ह्वेनसांग हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया और नालंदा में अध्ययन किया।
हर्षवर्धन प्रति पाँच वर्ष में प्रयाग में धार्मिक सभा (महामोक्ष परिषद) आयोजित करता था।
दक्षिण भारत में पल्लव वंश ने कांचीपुरम से शासन करते हुए महाबलीपुरम के रथ मंदिरों जैसे स्थापत्य को बढ़ावा दिया।
चालुक्य वंश (बादामी) के शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था।
ऐहोल अभिलेख पुलकेशिन द्वितीय की उपलब्धियों का वर्णन करता है, जिसकी रचना कवि रविकीर्ति ने की।
राष्ट्रकूट वंश ने मान्यखेट से शासन किया तथा एलोरा के प्रसिद्ध कैलाश मंदिर का निर्माण कराया।
राष्ट्रकूट शासक अमोघवर्ष ने कविराजमार्ग नामक कन्नड़ ग्रंथ की रचना की।
चोल वंश के शासक राजराजा प्रथम ने तंजावुर में बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया।
राजराजा के पुत्र राजेंद्र प्रथम चोल ने विशाल नौसेना के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया तक विजय अभियान चलाया और गंगईकोंडचोलपुरम नगर बसाया।
चोल प्रशासन में स्थानीय स्वशासन की जानकारी उत्तरमेरूर अभिलेख से मिलती है, जिसमें ग्राम सभाओं के चुनाव का वर्णन है।
दक्षिण भारत में पांड्य वंश मदुरै से तथा चेर वंश केरल क्षेत्र से मसाला व्यापार के लिए प्रसिद्ध थे।
उत्तर भारत में गुर्जर-प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट वंशों के बीच कन्नौज पर अधिकार हेतु 'त्रिकोणीय संघर्ष' चला।
पाल वंश के शासक धर्मपाल ने बिहार में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की।
चंदेल वंश ने मध्य भारत में खजुराहो के मंदिरों का निर्माण करवाया, जो अपनी मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध हैं।
परमार वंश के शासक राजा भोज ने धार को शिक्षा व साहित्य का केंद्र बनाया।
पृथ्वीराज चौहान ने 1191 ई. में तराइन के प्रथम युद्ध में मुहम्मद गोरी को पराजित किया।
1192 ई. में तराइन के द्वितीय युद्ध में मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित कर उत्तर भारत में तुर्क सत्ता की नींव रखी।
712 ई. में मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर आक्रमण कर भारत में पहला अरब-मुस्लिम प्रभाव स्थापित किया।
महमूद गजनवी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किए, जिनमें सोमनाथ मंदिर की लूट सबसे प्रसिद्ध है।
कुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली सल्तनत का प्रथम शासक तथा गुलाम (मामलुक) वंश का संस्थापक था, जिसने कुतुबमीनार का निर्माण आरंभ कराया।
इल्तुतमिश ने दिल्ली सल्तनत को मजबूत किया तथा चाँदी का टंका व तांबे का जीतल प्रचलित किया।
रजिया सुल्तान दिल्ली सल्तनत की प्रथम और एकमात्र महिला शासक थीं।
गियासुद्दीन बलबन ने रक्त और लौह की नीति तथा 'सिजदा-पाबोस' प्रथा अपनाकर राजतंत्र को सुदृढ़ किया।
जलालुद्दीन खिलजी ने खिलजी वंश की स्थापना कर एक 'उदार नीति' अपनाई।
अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण हेतु वस्तुओं की कीमतें निर्धारित कीं तथा मंगोल आक्रमणों को विफल किया।
अलाउद्दीन के सेनापति मलिक काफूर ने दक्षिण भारत में विजय अभियान चलाकर देवगिरि, वारंगल व द्वारसमुद्र को जीता।
मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित करने तथा सांकेतिक ताम्र मुद्रा चलाने के असफल प्रयोग किए।
मोरक्को यात्री इब्न बतूता मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत आया और अपने यात्रा-विवरण में तत्कालीन समाज का वर्णन किया।
फिरोज शाह तुगलक ने सिंचाई हेतु नहरों का निर्माण कराया और कृषि सुधार व लोक-कल्याण कार्यों को बढ़ावा दिया।
1398 ई. में तैमूर के आक्रमण से दिल्ली सल्तनत की शक्ति काफी कमजोर हो गई।
तुगलक वंश के बाद सैयद वंश की स्थापना खिज्र खान ने की।
सल्तनत काल के अंतिम वंश लोदी वंश के संस्थापक बहलोल लोदी थे, जिसके बाद सिकंदर लोदी व इब्राहिम लोदी शासक बने।
दिल्ली सल्तनत में भूमि प्रशासन हेतु इक्ता प्रणाली लागू की गई थी।
अमीर खुसरो को हिंदुस्तानी संगीत में 'सितार' के आविष्कार तथा फारसी-हिंदवी काव्य रचनाओं के लिए जाना जाता है।
जियाउद्दीन बरनी दिल्ली सल्तनत काल के प्रमुख इतिहासकार थे, जिन्होंने 'तारीख-ए-फिरोजशाही' लिखी।
भक्ति आंदोलन के अंतर्गत रामानुज ने विशिष्टाद्वैत दर्शन तथा भक्ति के महत्व का प्रचार किया।
कर्नाटक में बासवन्ना ने लिंगायत संप्रदाय की स्थापना कर जातिभेद का विरोध किया।
कबीरदास ने निर्गुण भक्ति परंपरा के माध्यम से हिंदू-मुस्लिम एकता व सामाजिक समानता का संदेश दिया।
संत रविदास ने समाज में समानता व भक्ति के महत्व का प्रचार किया।
चैतन्य महाप्रभु ने बंगाल में वैष्णव भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाया।
मीराबाई कृष्ण भक्ति की प्रसिद्ध कवयित्री थीं, जिनके भजन आज भी लोकप्रिय हैं।
सूफी आंदोलन में चिश्ती सिलसिले के संस्थापक ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में दरगाह स्थापित की।
निजामुद्दीन औलिया दिल्ली के प्रसिद्ध चिश्ती सूफी संत थे, जिनकी शिक्षाओं ने भक्ति-सूफी समन्वय को बढ़ावा दिया।
भक्ति व सूफी आंदोलनों से मध्यकालीन भारत में गंगा-जमुनी तहजीब (सांस्कृतिक समन्वय) को बढ़ावा मिला।
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना हरिहर और बुक्का ने 1336 ई. में की थी।
कृष्णदेवराय, तुलुव वंश के शासक, विजयनगर के सबसे प्रतापी सम्राट माने जाते हैं, जिन्होंने तेलुगु ग्रंथ आमुक्तमाल्यद की रचना की।
कृष्णदेवराय के दरबार में आठ प्रसिद्ध तेलुगु कवि अष्टदिग्गज कहलाते थे।
हम्पी (कर्नाटक) विजयनगर साम्राज्य की राजधानी के भग्नावशेषों के लिए प्रसिद्ध है, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है।
दक्कन में बहमनी साम्राज्य की स्थापना अलाउद्दीन हसन बहमन शाह ने की थी।
1565 ई. के तालीकोटा युद्ध में दक्कनी सल्तनतों के संयुक्त आक्रमण से विजयनगर साम्राज्य का पतन हुआ।
बहमनी साम्राज्य विभाजित होकर बीजापुर, गोलकुंडा, अहमदनगर, बरार व बीदर — पाँच दक्कनी सल्तनतों में बदल गया।
गोलकुंडा की कुतुबशाही सल्तनत हीरे की खानों व चारमीनार निर्माण के लिए प्रसिद्ध रही।
बाबर ने 1526 ई. में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर मुगल सत्ता की नींव रखी।
1527 ई. में खानवा के युद्ध में बाबर ने राजपूत शासक राणा सांगा को पराजित किया।
बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा तुर्की भाषा में लिखी।
शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को पराजित कर सूरी साम्राज्य स्थापित किया, रुपया मुद्रा चलाई तथा ग्रांड ट्रंक रोड का निर्माण करवाया।
1556 ई. में अकबर ने हेमू को पानीपत के द्वितीय युद्ध में पराजित कर मुगल सत्ता पुनः स्थापित की।
अकबर ने राजपूत राजाओं से वैवाहिक व राजनीतिक संबंध स्थापित किए, जिसमें आमेर की राजकुमारी जोधाबाई से विवाह प्रमुख है।
अकबर ने सुलह-ए-कुल की नीति अपनाकर धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दिया तथा दीन-ए-इलाही पंथ चलाया।
अकबर के भू-राजस्व मंत्री राजा टोडरमल ने जब्ती (जाब्ती) प्रणाली लागू की।
अकबर ने सेना और प्रशासन के लिए मनसबदारी प्रणाली की शुरुआत की।
अबुल फजल ने अकबरनामा और आइन-ए-अकबरी जैसी ऐतिहासिक रचनाएँ कीं।
अकबर के दरबारी संगीतज्ञ तानसेन हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महानतम कलाकारों में गिने जाते हैं।
अकबर ने फतेहपुर सीकरी को कुछ समय के लिए अपनी राजधानी बनाया था।
जहाँगीर के शासनकाल में न्याय हेतु महल के बाहर जंजीर-ए-अदल (न्याय की जंजीर) लगाई गई थी।
जहाँगीर की पत्नी नूरजहाँ का प्रशासनिक मामलों में महत्वपूर्ण प्रभाव था।
शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की स्मृति में आगरा में ताजमहल का निर्माण करवाया।
शाहजहाँ के शासनकाल में निर्मित मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताऊस) मुगल वैभव का प्रतीक था।
औरंगजेब मुगल साम्राज्य का अंतिम शक्तिशाली शासक माना जाता है, जिसने जज़िया कर पुनः लागू किया।
औरंगजेब का अधिकांश शासनकाल दक्कन में मराठों के विरुद्ध लंबे युद्धों में व्यतीत हुआ।
औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य कमजोर होने लगा और उत्तराधिकारी शासक निर्बल सिद्ध हुए।
1739 ई. में नादिरशाह ने दिल्ली पर आक्रमण कर मयूर सिंहासन सहित अपार धन लूटा।
बाद में अहमदशाह अब्दाली के बार-बार आक्रमणों ने मुगल सत्ता को और कमजोर किया।
शिवाजी ने मराठा साम्राज्य की नींव रखी और 1674 ई. में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ।
शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था में अष्टप्रधान मंडल नामक आठ मंत्रियों की परिषद कार्य करती थी।
पेशवा बालाजी विश्वनाथ ने मराठा प्रशासन में पेशवा पद को वंशानुगत व शक्तिशाली बनाया।
पेशवा बाजीराव प्रथम के नेतृत्व में मराठा साम्राज्य का उत्तर भारत तक विस्तार हुआ।
मराठा शासन व्यवस्था में चौथ और सरदेशमुखी नामक कर वसूली प्रणाली प्रचलित थी।
1761 ई. में पानीपत के तृतीय युद्ध में मराठों को अहमदशाह अब्दाली से करारी हार का सामना करना पड़ा।
गुरु नानक देव ने सिख धर्म की स्थापना कर एकेश्वरवाद और मानव समानता का संदेश दिया।
पाँचवें गुरु गुरु अर्जुन देव ने अमृतसर में स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब) का निर्माण करवाया और आदि ग्रंथ संकलित किया।
नौवें गुरु गुरु तेगबहादुर को औरंगजेब के आदेश पर धर्म-रक्षा हेतु शहीद कर दिया गया।
गुरु गोविंद सिंह ने 1699 ई. में खालसा पंथ की स्थापना कर पंच प्यारे की परंपरा शुरू की।
गुरु गोविंद सिंह के बाद बंदा बहादुर ने सिख सैन्य शक्ति को संगठित किया।
उन्नीसवीं सदी में महाराजा रणजीत सिंह ने लाहौर को राजधानी बनाकर शक्तिशाली सिख साम्राज्य स्थापित किया।
असम में अहोम राजवंश ने लगभग छह सौ वर्षों तक शासन किया और मुगल आक्रमणों को विफल किया।
मेवाड़ के महाराणा प्रताप ने 1576 ई. के हल्दीघाटी युद्ध में मुगल सेना का डटकर सामना किया।
1498 ई. में वास्को द गामा समुद्री मार्ग से कालीकट (केरल) पहुँचने वाला पहला यूरोपीय था।
अल्बुकर्क ने 1510 ई. में गोवा पर अधिकार कर भारत में पुर्तगाली शक्ति की नींव रखी।
डच ईस्ट इंडिया कंपनी तथा फ्रांसीसी कम्पानी देस इंदेस ने भी भारत में व्यापारिक उपनिवेश स्थापित किए।
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1600 ई. में इंग्लैंड में हुई, जिसे भारत में व्यापार का अधिकार प्राप्त हुआ।
अंग्रेजों ने भारत में सूरत, मद्रास, बंबई व कलकत्ता में व्यापारिक कोठियाँ (फैक्ट्रियाँ) स्थापित कीं।
दक्षिण भारत में अंग्रेज़ और फ्रांसीसी वर्चस्व की लड़ाई कर्नाटक युद्धों के रूप में लड़ी गई, जिसमें फ्रांसीसी गवर्नर डूप्ले की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
मैसूर के शासक हैदर अली और टीपू सुल्तान ने आंग्ल-मैसूर युद्धों में अंग्रेजों का प्रतिरोध किया।
1799 ई. में श्रीरंगपट्टनम के युद्ध में टीपू सुल्तान की मृत्यु हुई और मैसूर पर अंग्रेजी नियंत्रण स्थापित हुआ।
ब्रिटिश और मराठों के बीच तीन आंग्ल-मराठा युद्ध लड़े गए, जिनके बाद मराठा शक्ति पूर्णतः समाप्त हो गई।
दो आंग्ल-सिख युद्धों के बाद 1849 ई. में पंजाब पर अंग्रेजी शासन स्थापित हो गया।
गवर्नर-जनरल लॉर्ड वेलेजली ने भारतीय रियासतों को अंग्रेजी अधीनता में लाने हेतु सहायक संधि (सब्सिडियरी एलायंस) नीति अपनाई।
लॉर्ड डलहौजी ने व्यपगत सिद्धांत (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स) लागू कर कई देशी रियासतों को अंग्रेजी राज्य में मिलाया।
1773 ई. के रेगुलेटिंग एक्ट से भारत में पहली बार ब्रिटिश संसद द्वारा कंपनी के कार्यों पर नियंत्रण स्थापित हुआ।
1784 ई. के पिट्स इंडिया एक्ट ने कंपनी के राजनीतिक व वाणिज्यिक कार्यों को अलग किया।
1793 ई. में लॉर्ड कॉर्नवालिस ने बंगाल में स्थायी बंदोबस्त प्रणाली लागू की।
बाद में रैयतवाड़ी व महालवाड़ी भू-राजस्व प्रणालियाँ भी अन्य क्षेत्रों में लागू की गईं।
1829 ई. में लॉर्ड विलियम बेंटिंक ने राजा राममोहन राय के प्रयासों से सती प्रथा का उन्मूलन किया।
1835 ई. में मैकाले के शिक्षा प्रस्ताव (मिनट) के आधार पर भारत में अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली की नींव रखी गई।
1853 ई. में भारत में पहली रेलवे लाइन मुंबई से थाणे के बीच चलाई गई।
राजा राममोहन राय ने 1828 ई. में ब्रह्म समाज की स्थापना कर सामाजिक-धार्मिक सुधारों का बीड़ा उठाया।
ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने विधवा पुनर्विवाह के समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 ई. में आर्य समाज की स्थापना की और वेदों की ओर लौटने का आह्वान किया।
स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की और 1893 ई. के शिकागो धर्म सम्मेलन में भारतीय संस्कृति का परिचय कराया।
सर सैयद अहमद खान ने अलीगढ़ आंदोलन के माध्यम से मुस्लिम समुदाय में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिया।
ज्योतिराव फुले ने महाराष्ट्र में सत्यशोधक समाज की स्थापना कर जातिगत भेदभाव के विरुद्ध आंदोलन चलाया।
1857 का विद्रोह, जिसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भी कहा जाता है, मंगल पांडे के बैरकपुर विद्रोह से आरंभ हुआ माना जाता है।
विद्रोह का तात्कालिक कारण एनफील्ड राइफल के कारतूसों में गाय व सुअर की चर्बी होने की अफवाह बना।
विद्रोहियों ने वृद्ध मुगल शासक बहादुर शाह जफर को नाममात्र का सम्राट घोषित किया था।
रानी लक्ष्मीबाई ने 1857 के विद्रोह में झाँसी में अंग्रेजों के विरुद्ध वीरतापूर्ण संघर्ष किया।
तात्या टोपे ने कानपुर क्षेत्र में तथा नाना साहेब ने पेशवा पद की मांग करते हुए विद्रोह का नेतृत्व किया।
अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल ने लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया।
विद्रोह के दमन के बाद 1858 ई. के भारत सरकार अधिनियम से भारत का शासन ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया।
1861 ई. के भारतीय परिषद अधिनियम से भारतीयों को विधान परिषदों में सीमित प्रतिनिधित्व मिलना शुरू हुआ।
1883 ई. के इल्बर्ट बिल विवाद ने भारतीय व अंग्रेज न्यायाधीशों के बीच समानता के मुद्दे पर बहस छेड़ी।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 ई. में ए. ओ. ह्यूम की पहल पर हुई तथा इसके प्रथम अध्यक्ष डब्ल्यू. सी. बनर्जी थे।
प्रारंभिक कांग्रेस के उदारवादी नेताओं में दादाभाई नौरोजी ने अपने 'धन-अपवहन सिद्धांत (ड्रेन ऑफ वेल्थ)' से ब्रिटिश शोषण को उजागर किया।
गोपाल कृष्ण गोखले उदारवादी विचारधारा के प्रमुख नेता थे, जिन्हें महात्मा गांधी अपना राजनीतिक गुरु मानते थे।
1905 ई. में लॉर्ड कर्जन द्वारा किए गए बंगाल विभाजन के विरोध में स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ।
स्वदेशी आंदोलन के दौरान उग्रवादी नेता लाल-बाल-पाल (लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल) प्रमुख भूमिका में रहे।
1906 ई. में ढाका में मुस्लिम लीग की स्थापना हुई, जिसने पृथक मुस्लिम राजनीतिक पहचान की मांग उठाई।
1909 ई. के मार्ले-मिंटो सुधार में पहली बार सांप्रदायिक निर्वाचन प्रणाली की शुरुआत हुई।
1916 ई. के लखनऊ समझौते से कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच अस्थायी एकता स्थापित हुई।
एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक ने 1916 ई. में होमरूल आंदोलन चलाकर स्वशासन की मांग उठाई।
1915 ई. में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे, जहाँ उन्होंने पहले ही सत्याग्रह का प्रयोग किया था।
1917 ई. में गांधीजी के नेतृत्व में हुआ चंपारण सत्याग्रह उनका भारत में पहला प्रमुख सत्याग्रह माना जाता है।
1918 ई. का खेड़ा सत्याग्रह किसानों की कर संबंधी समस्याओं को लेकर तथा अहमदाबाद मिल हड़ताल मजदूरों के वेतन विवाद को लेकर चलाई गई थी।
1919 ई. में पारित रॉलेट एक्ट के विरोध में देशभर में व्यापक असंतोष फैला।
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में जनरल डायर के आदेश पर हुए जलियाँवाला बाग हत्याकांड ने राष्ट्रीय आंदोलन को नई तीव्रता दी।
प्रथम विश्व युद्ध के बाद भारतीय मुसलमानों द्वारा खिलाफत आंदोलन उस्मानी खलीफा के समर्थन में चलाया गया।
गांधीजी ने खिलाफत आंदोलन के साथ मिलकर 1920 ई. में असहयोग आंदोलन शुरू किया।
5 फरवरी 1922 को हुए चौरी-चौरा कांड के बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
1928 ई. में भारत आए साइमन कमीशन का विरोध करते हुए लाठीचार्ज में घायल लाला लाजपत राय की बाद में मृत्यु हो गई।
1928 ई. में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में तैयार नेहरू रिपोर्ट ने भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस की मांग रखी।
1929 ई. के लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की मांग को अपना लक्ष्य घोषित किया।
1930 ई. में गांधीजी ने नमक कानून के विरोध में साबरमती आश्रम से दांडी तक ऐतिहासिक दांडी मार्च निकाला, जिससे सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ।
सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान लंदन में तीन गोलमेज सम्मेलन आयोजित हुए, जिनमें गांधीजी ने द्वितीय सम्मेलन में भाग लिया।
1931 ई. के गांधी-इरविन समझौते के तहत गांधीजी सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित करने पर सहमत हुए।
1932 ई. का पूना पैक्ट गांधीजी और डॉ. अंबेडकर के बीच दलितों हेतु पृथक निर्वाचन के मुद्दे पर हुआ समझौता था।
1935 ई. के भारत सरकार अधिनियम में प्रांतीय स्वायत्तता तथा संघीय व्यवस्था का प्रावधान किया गया।
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए फाँसी की सजा पाई और शहीद हुए।
चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचएसआरए) ने क्रांतिकारी आंदोलन चलाया।
1925 ई. का काकोरी कांड क्रांतिकारियों द्वारा सरकारी खजाना लूटने की प्रसिद्ध घटना थी।
1942 ई. में क्रिप्स मिशन भारत में राजनीतिक गतिरोध सुलझाने हेतु भेजा गया, जो असफल रहा।
1942 ई. में शुरू हुए भारत छोड़ो आंदोलन का प्रमुख नारा "करो या मरो" था।
सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज (INA) का गठन कर सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्ति का प्रयास किया।
1946 ई. में कैबिनेट मिशन योजना भारत के भावी संविधान व सत्ता हस्तांतरण की रूपरेखा तय करने हेतु आई।
1947 ई. में माउंटबेटन योजना के अनुसार भारत के विभाजन और स्वतंत्रता की रूपरेखा तय की गई।
भारत-पाकिस्तान की सीमा रेखा निर्धारण हेतु गठित आयोग का नेतृत्व सर सिरिल रैडक्लिफ ने किया, जिसे रैडक्लिफ रेखा कहा गया।
भारत को 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिली और जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने।
डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान की मसौदा समिति का अध्यक्ष होने के कारण संविधान निर्माता कहा जाता है।
भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, जिसे प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद 500 से अधिक देशी रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिस कारण उन्हें लौह पुरुष कहा जाता है।
1947-48 ई. में हुए प्रथम भारत-पाक युद्ध के परिणामस्वरूप कश्मीर का विभाजन हुआ।
1956 ई. के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत भाषाई आधार पर भारत के राज्यों का पुनर्गठन किया गया।
1962 ई. में हुए भारत-चीन युद्ध में भारत को सीमा विवाद के कारण करारी हार मिली।
1965 ई. में द्वितीय भारत-पाक युद्ध हुआ, जो ताशकंद समझौते के साथ समाप्त हुआ।
1965-66 के दशक में शुरू हुई हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में सहायता की।
1971 ई. के भारत-पाक युद्ध के परिणामस्वरूप बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया।
1974 ई. में भारत ने पोखरण में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया, जिसे 'स्माइलिंग बुद्धा' नाम दिया गया।
1975 ई. में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की, जो 1977 तक लागू रहा।
1991 ई. में प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव तथा वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक उदारीकरण की नीति अपनाई।
1998 ई. में भारत ने पुनः पोखरण में परमाणु परीक्षण किए, जिससे भारत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना।
1999 ई. में कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच लद्दाख क्षेत्र में लड़ा गया।